गोवा नो डेवलपमेंट जोन क्षेत्र का दृश्यगोवा सरकार ने कई संवेदनशील इलाकों को नो डेवलपमेंट जोन घोषित किया।

गोवा सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने वाघेरी पहाड़ी और साओ-जोर्ज द्वीप को “गोवा नो डेवलपमेंट जोन” घोषित कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को रोकना और प्राकृतिक हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखना है। महाराष्ट्र-गोवा सीमा के पास स्थित वाघेरी पहाड़ी पश्चिमी घाट का अहम हिस्सा मानी जाती है। इसकी ऊंचाई करीब 780 मीटर है। सरकार के अनुसार यहां तेजी से ग्रीन कवर हटाया जा रहा था।

इसके बाद वन विभाग की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया। साथ ही मोरमुगाओ स्थित साओ-जोर्ज द्वीप को भी “गोवा नो डेवलपमेंट जोन” में शामिल किया गया है। यह क्षेत्र अपनी पर्यावरणीय और विरासत महत्व के लिए जाना जाता है। सरकार का कहना है कि इन इलाकों में अनियंत्रित विकास से प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता था। सरकार ने लोगों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां भी मांगी हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे पश्चिमी घाट और समुद्री क्षेत्रों की जैव विविधता सुरक्षित रहेगी।

FAQ

सवाल: गोवा नो डेवलपमेंट जोन क्या है?

जवाब: यह ऐसा क्षेत्र है जहां निर्माण और विकास गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।

सवाल: किन क्षेत्रों को नो डेवलपमेंट जोन बनाया गया है?

जवाब: वाघेरी पहाड़ी और साओ-जोर्ज द्वीप को इस श्रेणी में शामिल किया गया है।

सवाल: सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

जवाब: हरित आवरण और पर्यावरण संरक्षण को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

Prem Chand | Suryoday Samachar

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